गुप्त साम्राज्य का उदय Rise of Gupta Dynasty:
मौर्या सम्राज्य के पश्चात प्राचीन भारत का प्रमुख हिन्दू साम्राज्य था गुप्त साम्राज्य। इस सामाज्य का उदय तीसरी शताब्दी के अन्त में प्रयाग के निकट कौशाम्बी में हुआ था। जिस प्राचीनतम गुप्त राजा के बारे में पता चलता है वो थे श्रीगुप्त। पुराणों में ये कहा गया है कि आरंभिक गुप्त राजाओं का साम्राज्य गंगा द्रोणी, प्रयाग, साकेत (अयोध्या) तथा मगध में फैला हुआ था। बाद में इसका फैलाव अब के पाकिस्तान , पश्चिमी मध्य एवं पूर्वी भारत, नेपाल , बांग्लादेश तक फैला था। बाद में राजा विक्रमादित्य ने अपनी राजधानी उज्जैन में बनाई थी। गुप्त साम्राज्य 320ई से 550ई तक था उनके शासक इस प्रकार थे:
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श्रीगुप्त ShriGupt:
श्रीगुप्त के समय में महाराजा की उपाधि सामन्तों को प्रदान की जाती थी, अतः श्रीगुप्त किसी के अधीन शासक थे। इनके साम्राज्य में हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म के मिला जुला समन्वय था।
घटोत्कच गुप्त Ghatotkach Gupt:
श्रीगुप्त के बाद उसका पुत्र घटोत्कच गद्दी पर बैठा। 280 ई. से 320 ई. तक गुप्त साम्राज्य का शासक बना रहा। इसने भी महाराजा की उपाधि धारण की थी। कही कही इसे पहला गुप्त शासक कहा गया है।
चन्द्रगुप्त प्रथम Chandra Gupt (I):
चंद्रगुप्त प्रथम ऐसे पहले थे जिन्हें महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी। सन् 320 में चन्द्रगुप्त प्रथम अपने पिता घटोत्कच के बाद राजा बना। इसका शासन काल 320 ई. से 335 ई. तक था। चन्द्रगुप्त गुप्त वंशावली में पहला स्वतन्त्र शासक था। बाद में लिच्छवि को अपने साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया। चन्द्रगुप्त ने लिच्छवि के सहयोग और समर्थन पाने के लिए उनकी राजकुमारी कुमार देवी के साथ विवाह किया। इन्होंंने पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया।
समुद्रगुप्त Samudragupt:
समुद्रगुप्त एक असाधारण सैनिक योग्यता वाला महान विजित सम्राट था। विन्सेट स्मिथ ने इन्हें नेपोलियन की उपाधी दी। समुद्रगुप्त का शासनकाल राजनैतिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से गुप्त साम्राज्य के उत्कर्ष का काल माना जाता है। इस साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी। समुद्रगुप्त ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की। समुद्रगुप्त एक अच्छा राजा होने के अतिरिक्त एक अच्छा कवि तथा संगीतज्ञ भी था। उसका सबसे महत्वपूर्ण अभियान दक्षिण की तरफ़ दक्षिणापथ था। इसमें उसके बारह विजयों का उल्लेख मिलता है।
रामगुप्त RamGupt:
समुद्रगुप्त के बाद रामगुप्त सम्राट बना, लेकिन इसके राजा बनने में विभिन्न विद्वानों में मतभेद है। कहा जाता है वो बहुत कमजोर और खराब युद्धकौशल का था।
चन्द्रगुप्त द्वितीय या विक्रमादित्य ChandraGupta II or Vikramaditya:
चन्द्रगुप्त ने नाग राजकुमारी कुबेर नागा के साथ विवाह किया जिससे एक कन्या प्रभावती गुप्त पैदा हुई। वाकाटकों का सहयोग पाने के लिए चन्द्रगुप्त ने अपनी पुत्री प्रभावती गुप्त का विवाह वाकाटक नरेश रूद्रसेन द्वितीय के साथ कर दिया। उसने एसा संभवतः इसलिए किया कि शकों पर आक्रमण करने से पहले दक्कन में उसको समर्थन हासिल हो जाए। उसने प्रभावती गुप्त के सहयोग से गुजरात और काठियावाड़ की विजय प्राप्त की। वाकाटकों और गुप्तों की सम्मिलित शक्ति से शकों का उन्मूलन किया। कदम्ब राजवंश का शासन कुंतल (कर्नाटक) में था। चन्द्रगुप्त के पुत्र कुमारगुप्त प्रथम का विवाह कदम्ब वंश में हुआ।
शक उस समय गुजरात तथा मालवा के प्रदेशों पर राज कर रहे थे। शकों पर विजय के बाद उसका साम्राज्य न केवल मजबूत बना बल्कि उसका पश्चिमी समुद्र पत्तनों पर अधिपत्य भी स्थापित हुआ। इस विजय के पश्चात उज्जैन गुप्त साम्राज्य की राजधानी बना। इनके महत्वपूर्ण विजय वाहीक विजय, और बंगाल विजय था।
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